Category: Culture

कटिहार में दुर्गा पूजा पंडालो का हुआ उद्घाटन

कटिहार में दुर्गा पूजा पंडालो का हुआ उद्घाटन

कटिहार में दुर्गा पूजा की धूम जोरो पर है| कल लगभग सभी पंडालो का उद्घाटन कटिहार के माननीय लोगो द्वारा किया गया| फेसबुक से लाये कुछ तसवीरें अशोक अगरवाल जी की वाल से पवन जोशी जी की वाल से
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गणेशउत्सव मनाया जा रहा है पुरे उल्लास से

कटिहार के दुर्गास्थान में सार्वजनिक गणोश पूजा समिति द्वारा आयोजित गणोश उत्सव जोरो पर है| पांच सितम्बर से शुरू हुए उत्सव में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। 14 सितम्बर को शोभायात्रा के साथ भगवनगणेश का विसर्जन किया जायेगा|। उत्सव के दौरान हर दिन विधि विधान से पूजा के साथ भजन-कीर्तन का भी आयोजन किया जा रहा है।भक्तो ने ५१ किलो लड्डू का भोग अपने गणपति को लगाया |
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Shiv Mandir Katihar

सावन की पहली सोमवारी आज मनाई गई|

सावन के पहले सोमवार में भक्तो में बड़ा उत्साह है| पहले सोमवार पर भक्तो ने शिवमंदिर में पूजा अर्चना की| उधर देवघर में भी सावन के पहले सोमवार पर भक्तो का ताँता लगा रहा|भक्तो ने शहर के विभिन्न शिवालयो में जाकर शिव और पारवती का जलाभिषेक किया| रविवार को स्वान की पांचवी तिथि को मधुश्रामनी की भी शुरुआत हुई|नवविवाहित महिलाये इस दिन से भगवन शिव की विभिन्न रूपों में आराधना करती है|
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Hanuman Jayanti 2016 Katihar

हनुमान जयन्ती पर निकली भव्य शोभा यात्रा

Katihar (Kumar Neeraj) :हनुमान जयन्ति के अवसर पर कटिहार में विशाल निशान शोभा यात्रा निकाली गयी। नगर के अग्रसेन भवन से निकली यात्रा में सैकडों महिला पुरुषों ने भाग लिया और नगर के सभी प्रमुख मार्गों से भ्रमण किया।
शोभा यात्रा यज्ञशाला मंदिर में पहूंचा जहां श्रद्धुलुओं ने भगवान हनुमान को निशान भेंट किया और पूजा अर्चना किया। यहां बता दे कि कटिहार के यज्ञशाला मंदिर में पिछले 34 सालों से अखंड रामायण का पाठ किया जा रहा है।
मंदिर को अशोक वाटिका के शक्ल में सजाया गया है।
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Chaiti Navratra 2016

गुरुवार से चैती नवरात्र का हुआ शुभारंभ |

गुरुवार को महाल्या के साथ चैती नवरात्र की शुरुआत हो गयी है | कल 8 अप्रैल को नवरात्र की पहली पूजा होगी और १६ अप्रैल को नवरात्र का समापन होगा |
कटिहार में सभी दुर्गा मंदिरों में तैयारिया पूरी कर ली गयी हैं | कई लोग अपने घरो पर ही पूजा पाठ करते है |
पंडितों के अनुसार इस बार चैती दुर्गा माता डोली में आएँगी और उनकी वापसी मुर्गे द्वारा होगी |
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solar eclipse katihar

9 मार्च २०१६ आंशिक रूप से दिखेगा को साल का पहला पूर्ण सूर्यग्रहण

9 मार्च २०१६ को होने वाला है साल का पहला सूर्यग्रहण | लेकिन हमारे शहर कटिहार में आंशिक रूप से ही दिखेगा |सुबह ५.५५ पर शुरू होगा ये सूर्यग्रहण और 6.४८ पर ख़तम को जायेगा | सुबह 6 बजकर 10 मिनट पर ये सबसे ज्यादा रहेगा | सूर्यग्रहण एक प्राकृतिक प्रक्रिया है | इसे देखने के लिए सावधानिया बरते | [caption id="attachment_1730" align="alignright" width="300"]solar eclipse katihar solar eclipse katihar[/caption]
भौतिक विज्ञान की दृष्टि से जब सूर्य व पृथ्वी के बीच में चन्द्रमा आ जाता है तो चन्द्रमा के पीछे सूर्य का बिम्ब कुछ समय के लिए ढ़क जाता है, उसी घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है। पृथ्वी सूरज की परिक्रमा करती है और चाँद पृथ्वी की। कभी-कभी चाँद, सूरज और धरती के बीच आ जाता है। फिर वह सूरज की कुछ या सारी रोशनी रोक लेता है जिससे धरती पर साया फैल जाता है। इस घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है। यह घटना सदा सर्वदा अमावस्या को ही होती है।
हमारे ऋषि-मुनियों ने सूर्य ग्रहण लगने के समय भोजन के लिए मना किया है, क्योंकि उनकी मान्यता थी कि ग्रहण के समय में कीटाणु बहुलता से फैल जाते हैं। खाद्य वस्तु, जल आदि में सूक्ष्म जीवाणु एकत्रित होकर उसे दूषित कर देते हैं। इसलिए ऋषियों ने पात्रों के कुश डालने को कहा है, ताकि सब कीटाणु कुश में एकत्रित हो जाएं और उन्हें ग्रहण के बाद फेंका जा सके। पात्रों में अग्नि डालकर उन्हें पवित्र बनाया जाता है ताकि कीटाणु मर जाएं। ग्रहण के बाद स्नान करने का विधान इसलिए बनाया गया ताकि स्नान के दौरान शरीर के अंदर ऊष्मा का प्रवाह बढ़े, भीतर-बाहर के कीटाणु नष्ट हो जाएं और धुल कर बह जाएं। पर अब सूर्यग्रहण पर ऐसा करना आवश्यक नहीं माना जाता है| कोई वैज्ञानिक कारण स्पष्ट नहीं है परन्तु लोग श्रधा से कुछ नियमो का पालन करते है |
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Shiv Mandir at Katihar Mahashivratri

बाबा गोरखनाथ मंदिर ,भारीडीह सहित कटिहार के विभिन्न मंदिरों में महाशिवरात्रि

कटिहार के आजमनगर प्रखंड क्षेत्र के मिनी बाबाधाम के नाम से प्रसिद्ध गोरखनाथ धाम मंदिर में महाशिवरात्री की तैयारी में मंदिर को सजाने का काम बड़े उत्साह से चल रहा था|हर साल की तरह आज भी महाशिवरात्रि पर भक्त हजारो की संख्या में यहाँ पहुचेंगे | शिव पार्वती विवाहोत्सव तो देखते ही बनता है| आसपास के इलाके से भक्त इस मनोरम दृश्य के दर्शन को आते है | यहाँ पर इस उपलक्ष में मेले का भी आयोजन किया जाता है |
वही हसनगंज के भारीडीह में भी आज महाशिवरात्रि की धूम रहेगी| तहां पर भी कावारिया जल चधंवे पहुचेंगे
[caption id="attachment_1706" align="alignright" width="300"]Shiv Mandir at Katihar Mahashivratri Shiv Mandir at Katihar Mahashivratri[/caption]| कटिहार के विभिन्न शिव मंदिरों में शिवरात्रि की तैयारिया हो चुकी है |कष्टहरण गौरीशंकर मंदिर, bmp7 शिवमंदिर ,शिवमंदिर कालीबाड़ी,शिवमंदिर चौक, हवाई अड्डा शिवमंदिर पर भी तैयारियां हुई है |

Maha Shivratri 2016

Posted by Katihar on Tuesday, March 8, 2016
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Saraswati mata on scooty

Saraswati Puja 2016 katihar in Pictures

कटिहार में धूम धाम से मनाया गया सरस्वती पूजा का त्यौहार| गली गली में कई छोटे बड़े पंडाल देखने को मिल रहे है| लोगो में, खासकर बच्चो में सरस्वती पूजा को लेकर काफी उत्साह दिखाई देता है| कई स्थानों पर पूजा अर्चना की गयी |डेहरिया के ऍफ़ सी आई मैदान में,बिनोदपुर,ओटी पाड़ा,राजहाता सहित कई जगहों पर माता सरस्वती की सुन्दर प्रतिमाये स्थापित की गयी है|[caption id="attachment_1310" align="aligncenter" width="445"]Saraswati Puja 2016 (festivals in Katihar) Saraswati Puja 2016 (festivals in Katihar)[/caption] [caption id="attachment_1323" align="aligncenter" width="300"]Saraswati Puja at Larkaniya tola katihar Saraswati Puja at Larkaniya tola katihar[/caption] courtesy facebook और तस्वीरे शीघ्र ही इसी पेज पर देखिये|
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Shiv Charcha Durgasthan Katihar

दुर्गा स्थान में एक दिवसीय शिव चर्चा में उभरे लाखो भक्त |

कटिहार के दुर्गा स्थान मंदिर प्रांगण मे एक दिवसीय शिव चर्चा का आयोजन किया गया जिसमे परम आदरणीय गुरु अर्चित आनंद, सोनू भैया और अभिनय आनंद जैसे गुरु ने अपना प्रवचन दिया |इनके प्रवचन को सुनने के लिए दूर दूर से लाखो शिव भक्त और शिव शिस्याए कटिहार के दुर्गा मंदिर प्रांगण पहुंचे |और उनके प्रवचन को सुन कर अपने ग्रहस्त जीवन मे उतारने की कोशिश करने की बात कही | [caption id="attachment_1195" align="alignright" width="300"]Durgasthan Katihar Shiv charcha Durgasthan Katihar Shiv charcha [/caption] एक दिवसीय शिव चर्चा के आयोजन को लेकर कई दिनों से तैयारी की गयी थी | पूरा शहर भक्ति मय माहौल मे बदल गया था |
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Coconut

महिलाओ को कभी नहीं फोड़ती चाहिए नारियल

नारियल को श्रीफल के नाम से भी जाना जाता है। ऐसी मान्यता है की जब भगवान विष्णु ने पृथ्वी पर अवतार लिया तो वे अपने साथ तीन चीजें- लक्ष्मी, नारियल का वृक्ष तथा कामधेनु लाए इसलिए नारियल के वृक्ष को श्रीफल भी कहा जाता है। श्री का अर्थ है लक्ष्मी अर्थात नारियल लक्ष्मी व विष्णु का फल। नारियल में त्रिदेव अर्थात ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना गया है। श्रीफल भगवान शिव का परम प्रिय फल है। मान्यता अनुसार नारियल में बनी तीन आंखों को त्रिनेत्र के रूप में देखा जाता है। श्रीफल खाने से शारीरिक दुर्बलता दूर होती है। इष्ट को नारियल चढ़ाने से धन संबंधी समस्याएं दूर हो जाती हैं। [caption id="attachment_1133" align="alignright" width="300"]Coconut Coconut[/caption]
भारतीय पूजन पद्धति में नारियल अर्थात श्रीफल का महत्वपूर्ण स्थान है। कोई भी वैदिक या दैविक पूजन प्रणाली श्रीफल के बलिदान के बिना अधूरी मानी जाती है। यह भी एक तथ्य है कि महिलाएं नारियल नहीं फोड़तीं। श्रीफल बीज रूप है, इसलिए इसे उत्पादन अर्थात प्रजनन का कारक माना जाता है। श्रीफल को प्रजनन क्षमता से जोड़ा गया है। स्त्रियों बीज रूप से ही शिशु को जन्म देती हैं और इसलिए नारी के लिए बीज रूपी नारियल को फोड़ना अशुभ माना गया है। देवी-देवताओं को श्रीफल चढ़ाने के बाद पुरुष ही इसे फोड़ते हैं। शनि की शांति हेतु नारियल के जल से शिवलिंग पर रुद्रभिषेक करने का शास्त्रीय विधान भी है।
भारतीय वैदिक परंपरा अनुसार श्रीफल शुभ, समृद्धि, सम्मान, उन्नति और सौभाग्य का सूचक माना जाता है। किसी को सम्मान देने के लिए उनी शॉल के साथ श्रीफल भी भेंट किया जाता है। भारतीय सामाजिक रीति-रिवाजों में भी शुभ शगुन के तौर पर श्रीफल भेंट करने की परंपरा युगों से चली आ रही है। विवाह की सुनिश्चित करने हेतु अर्थात तिलक के समय श्रीफल भेंट किया जाता है। बिदाई के समय नारियल व धनराशि भेंट की जाती है। यहां तक की अंतिम संस्कार के समय भी चिता के साथ नारियल जलाए जाते हैं। वैदिक अनुष्ठानों में कर्मकांड में सूखे नारियल को वेदी में होम किया जाता है।  श्रीफल कैलोरी से भरपूर होता है। इसकी तासीर ठंडी होती है। इसमें अनेक पोषक तत्व होते हैं। इसके कोमल तनों से जो रस निकलता है उसे नीरा कहते हैं उसे लज्जतदार पेय माना जाता है। सोते समय नारियल पानी पीने से नाड़ी संस्थान को बल मिलता है तथा नींद अच्छी आती है। इसके पानी में पोटेशियम और क्लोरीन होता है जो मां के दूध के समान होता है। जिन शिशुओं को दूध नहीं पचता उन्हें दूध के साथ नारियल पानी मिलाकर पिलाना चाहिए। डि-हाइड्रेशन होने पर नारियल पानी में नीबू मिलाकर पिया जाता है। इसकी गिरी खाने से कामशक्ति बढ़ती है। मिश्री संग खाने से गर्भवती स्त्री की शारीरिक दुर्बलता दूर होती है तथा बच्चा सुंदर होता है। Disclaimer: ये लेखक के अपने विचार है |कटिहार मिरर्र ऐसी पारंपरिक मान्यताओं का न तो खंडन करता है और न ही समर्थन |
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